गैरोँ के हाथ बेदाम होती जा रही मेरी जिन्दगी |
चन्द उसुलोँ ने ही तबाह कर डाला
सारे महकमे को ,
बेउसुलपरस्त होती जा रही मेरी जिन्दगी ।
जिता था मैँ ,हरपल दुसरोँ के नाम को ,
हर गैर अब छिनता जा रहा मेरी जिन्दगी ।
हर साँस मेरी फ़ना थी उसकी जान के उपर
उसकी जान ,साँस घोटती जा रही मेरी जिन्दगी ।
जलज ,तु खुद को बदल ले
अपने उसुल तु बदल ले ,
वरना जिन्दगी चली जाएगी और
बस हाथ मलती रह जाएगी तेरी जिन्दगी ।।।
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....jalaj@sujeet........