Tuesday, November 6, 2012

RHAPSODY

जरुर ही हम लोग किसी अच्छे और खास माँग को लेकर
धरणा पर है ,तभी तो प्रशासन हमसे नजरे चुरा रहा है ।
और माँग अगर खास नही होती तो शायद अब तक हम अपने
VIVA को लेकर रो रहे होते ।
बचपन की एक बात याद है मुझे । चिज जितनी खास होती ,
मेरी जीद उतनी पक्की । अब जरा उल्टा सोचकर देखता हुँ

जिद जितनी पक्की ,चिज उतनी खास । मतलब
कि RHAPSODY is really a nice thing.
दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद मजदुर को अगर रात
को भुखे पेट सोना पड़ जाए ।तो वो दिन दुर नही ,जब
मजदुर कहीँ भी अपना होश गँवा कर कहीँ भी आराम से
सो जाए ।
थोड़ी सी मस्ती करने का हक तो हमेँ भी है ही । भला कौन
सा गुनाह हमने कर दिया ये MEDICAL SCIENCE
लेकर ,जो हमेँ जिन्दगी के हर खुबसुरत लम्होँ से महरुम
किया जा रहा है ।
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....jalaj@sujeet........

Thursday, November 1, 2012

लाजिमी है डरना इन पिल्लोँ से

एक नया सा मौसम आ गया है ,मेरे इस नये शहर मेँ ।दो महिने पहले ही सब कुछ
नया था मेरे लिए ।पर अब आँखो को तो एक आदत सी हो गई है रोज रोज इन्हेँ
देखते हुए ।अब उसी पुराने माहौल मेँ नया मौसम आया ,तो मेरी तंद्रा भंग
हुई ।ऐसे भी जब नयापन का एहसास होता है ,तो दिल मेँ रोमांच आ ही जाता है
।थोड़ा सा मैँ भी झुमा मौसम की मस्ती मेँ ।ठंढ़ी हवाएँ ,आधी रात को ,जिनसे
मेरा बहुत ही पुराना रिश्ता रहा था ! एक बार फिर से ख्वाहिश जाग उठी है
,झुमुँ मैँ उन ठंडी हवाओँ के थपेड़ोँ के साथ ।
भुल जाऊँ मैँ खुद को ताकि खुद से मिलने का सपना फिर से ज़वां हो सके ।
पर यहाँ कुछ हालात अलग हैँ तो कुछ मेरे सोचने का नजरिया ।फिर माहौल का भी
तो हमारे नजरिये पर गहरा प्रभाव पड़ता है ।
आधी रात को जब भी मैँ खुद से मिलने निकलता हुँ ,आसमान की छत के नीचे ।तो
बुरा लगता है उन छोटे छोटे पिल्लोँ को जिन्होनेँ अभी कुछ दिन पहले ही
जन्म लिया है ।भौँकते हैँ वो मेरे उपर ताकि मैँ डर जाऊँ उनसे और लौट जाऊँ
वापस अपने आशियाने मेँ ।मुझे हँसी भी आती है उनके आदत और हिम्मत देखकर ।
मैँ नही लौटना चाहता पर उनकी उग्रता देख मैँ लौट जाता हुँ ।यही ख्याल
करता हुँ कि बेचारे पिल्ले ,जो हमारे समाज के सुनहरे भविष्य के कुत्ते
हैँ ,वो ही सुकुन से जिएँ ।मैँ तो अपने दिल के मकान मेँ भी खुद से मिल
सकता हुँ ।
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....jalaj@sujeet........