Sunday, August 18, 2013

मात्र दो सेकण्ड का अनुभव

                    मात्र दो सेकण्ड का अनुभव
Date -29/12/2006                                                                     Day- Friday

10वीं एवं 12वीं की meeting दोपहर लगभग एक बजकर पच्चीस मिनट पर समाप्त हुई थी। hostel में लौटने के बाद मैं बाथरुम चला गया । मजाकवश ही सही मेरे एक दोस्त ने बाथरुम का दरवाजा बाहर से lock कर दिया ।काफी देर तक मैं भीतर निकलने का तरीका ढ़ुंढ़ता रहा। आवाज देने का कोई फायदा भी नही , क्योंकि लगभग सभी लोग खाना  खाने मेस जा चुके थे।
बाहर निकलने का जब कोई रास्ता न दिखा तो मैने रोशनदान से निकलने का फैसला किया । और रोशनदान पर चढ़कर बाहरी तरफ निकलकर पाइप को पकड़कर खड़ा हो गया । नीचे से लगभग 20 फीट की ऊँचाई और मैं दीवार के बीचो-बीच पाइप से चिपका हुआ था। हिम्मत बढ़ाई उस उपरवाले ने और मैं धीरे-धीरे नीचे उतरने का प्रयास करने लगा । तभी मुझे ऐसा लगा कि यह पाइप दीवार से उखड़ने वाला है । मेरे पास वक़्त कम था । मैने आव देखा न ताव , अपने कंधे को बांयी तरफ कस कर झटका देकर पंजो एवं घुटनों के बल नीचे कुद गया। गलतीवश मेरा दाहिना पैर उस पाइप से टकरा गया और वह भी दीवार से उखड़कर नीचे गिर गया । मुझे इस बात का एह्सास हो गया था कि पाइप वहाँ से हट गया है । अतः नीचे गिरने के साथ ही मैनें झटके से उपर देखा। देखा…… वह पाइप बिल्कुल ही मेरे उपर गिर रहा था । तुरंत ही मै अपने पंजों को बल देकर दुसरी तरफ कुद गया। गलती से इस बार मैं एक ईंट के उपर जा गिरा ,जिससे की मेरे कमर एवं दाहिने पैर में एक हलकी सी चोट आयी। पर खुदा का शुक्र मानता हुँ कि 20 फीट की ऊँचाई से कुदने के बाद मुझे कहीं एक खरोंच तक नही आई। साथ में उस लोहे की भारी पाइप से बचने के क्रम में आई चोट को तुच्छ ही मानता हुँ ।
और इसी तरह से मेरे adventures वाली list में एक और पेज जुड़ गया था। फिर छत पर से कुदने कि ये मेरी एक और कहानी लोगों के बीच थी।

                                                         -- jalaj@sujeet--