Sunday, March 9, 2014

वो गरीब आदमी……………॥

मैंने देखा है
पिल्लों को भी
गले लगकर मां के सोते हुए।
चिंटियों के झुंड को सिकुड़कर
छोटा होते हुए।
और पानी की बुंदों को
वर्फ के फाहों से बरसते हुए॥
उस सर्द मौसम में,
देखा है मैंने ।
कलियों को खिलने से
शरमाते हुए,
पर सुरज के पौ फटने के साथ
महक बिखेरते हुए।
पर विचार बदल जाते हैं,
मानव की मानवता देखकर॥
उसी सर्द रातों में जो
कई मोटे मोटे लबादों में।
चुल्हे सी गर्म घरों में भी
काँप रहे हैं॥
वहीं बीच सड़क पर
नीचे खुले आसमां के तले
चादर ओढ़े बड़े चैन से
सो रहा है -------

वो गरीब आदमी……………॥॥

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