किसी की याद को दिल मेँ
छुपा कर रखना ,
कितना मुश्किल होता है ।
रोने को दिल चाहने
पर भी न रोना यारोँ ऐसा कितना मुश्किल होता है ।
ख्वाहिश मेरी तोड लुँ
सारे ताल्लुकात इन
बेरहम शायरियोँ से
पर शाम की तन्हाईयाँ गुजारना
कितना मुश्किल होता है ।
जाम का नशा तो नेअमत
कितना बेगरुर होता है ,
पर दिल से तेरा नशा उतारना
कितना मुश्किल होता है ।
सुजीत कुमार "जलज"
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....jalaj@sujeet........
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