Sunday, December 27, 2009

मुश्किल होता है

किसी की याद को दिल मेँ


छुपा कर रखना ,

कितना मुश्किल होता है ।

रोने को दिल चाहने

पर भी न रोना यारोँ ऐसा कितना मुश्किल होता है ।

ख्वाहिश मेरी तोड लुँ

सारे ताल्लुकात इन

बेरहम शायरियोँ से

पर शाम की तन्हाईयाँ गुजारना

कितना मुश्किल होता है ।

जाम का नशा तो नेअमत

कितना बेगरुर होता है ,

पर दिल से तेरा नशा उतारना

कितना मुश्किल होता है ।





सुजीत कुमार "जलज"



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....jalaj@sujeet........

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