Tuesday, December 29, 2009

इंतज़ार सुबह की

थी वह बरसात की रात ।एक अजनबी की तरह बादल गरजते,बिजली चमकती,बारिश होती और रात धीरे धीरे अपनी सरगोशियोँ की तरफ कदम बढा रही थी । बिजली चमकती तो ऐसा लगता किसी पत्थर दिल पर किसी ने पत्थर फेँका हो । पर बादल गरजते तो ऐसा लगता कि पत्थर फेँकते समय वे गला फाड कर चिल्लाया हो । पर फिर भी बारिश होती जा रही थी ,अश्कोँ कि।
आज सुबह कितनी खुली धूप थी।हवा मेँ नमी और धूप मेँ गर्मी बहुत अच्छी लग रही थी । कलियोँ का चटकना ,फूलोँ का महकना और उसका मुझसे बात करना ,सब कितना सहज था । मौसम और हसिन हुई जा रही थी । जैसे चाँद अपनी खुबसुरती को बढाकर पुरे फलक पे आना चाहते हो । सारे पक्षी व्यस्त थे । कुछ दाने चुगने मेँ और कुछ चहकने मेँ । इनका चहकना ,कुदना फांदना और फिर किसी डाली पर बैठ जाना ,मुझे इतना अच्छा लगा कि मैँ भी उछलने को हुआ कि किसी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे बैठे ही रहने को कहा । अफ़सोस हुआ कि मैँने अपना ध्यान कहीँ से हटा कर उन पक्षियोँ पर लगा दिया था । फिर भी बातोँ का सिलसिला आगे चल पड़ा । अपने कारवां के साथ मैँ सबोँ से आगे चल रहा था । अपने कारवां पर आने वाले मुसिबतोँ को सहने को सबसे आगे था । किसी वजह से मैँ वहीँ रूक गया , कारवां को आगे जाने दिया । जब मैँ चलने को उद्दत हुआ , तो किसी ने मेरे घोड़े कि लगाम छिन ली ।और .......और.....और...और फिर मैँ.....और मेरा अपहरण हो गया । मेरा अपहरण नही , मेरे दिल का अपहरण । मेरे दिल को उसने कहीँ छुपा दिया । फिरौती मेँ वे मुझसे अपना प्यार लौटा देने की बात कर रहा है । मैँ हिचकिचा रहा था,पर अंत मेँ तैयार हो गया ।भला दिल के बगैर भी कोई जीवित रह सकता है ।फिरौती दी मैँने ,पर वहीँ पर से एक पत्थर उठा चिख कर उसके दिल पर दे मारा ।
चिँगारी फूटी ,बड़े जोर की गर्जना हुई । मेरी आंखो से आँसुओँ की धार बह निकली ,पर वो खिलखिला पड़ी । मेरी बदहालत पर वो हँसी जा रही थी । मैँ कीचड़ से सराबोर था ।फिर भी बारिश मेँ खड़ा था । ताकि मिट्टी धुल जाए ।और मैँ फिर से उनके प्यार के काबिल हो जाऊँ ।पर न बारिश खत्म होती है ,न कीचड़ हटता है मेरे शरीर पर से । पर फिर भी इंतजार है सुबह की मेरे जीवन मेँ । इस दिल को नसीब होगा प्यार फिर आपका ।पर इंतजार है बस सुबह की

सुजीत कुमार "जलज"

3 comments:

संगीता पुरी said...

इस नए ब्‍लॉग के साथ नए वर्ष में हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. अच्‍छा लिखते हैं आप .. आपके और आपके परिवार वालों के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

dweepanter said...

नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ द्वीपांतर परिवार आपका ब्लाग जगत में स्वागत करता है।