उनकी चाहत और मेरी मोहब्बत मेँ ।
वो जब चाहेँ तो खिलखिला लेँ
मैँ सोच कर भी न मुस्कुरा पाऊँ ॥
आगोश मेँ वो भर लेँ मुझे
जब भी उनका जी चाहे,
एक आवाज़ भी न दे सकुँ मैँ
जब प्यास से मेरा जी घबराए॥।
ये फर्क है ए आसमाँ
उनकी चाहत और मेरी मोहब्बत मेँ ॥॥
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....jalaj@sujeet........

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