कहानी शुरु ही होती है ,बेपनाह मोहब्बत से ।और जगजाहिर है जहाँ मोहब्बत
है वहाँ परेशानियाँ तो होगी ही ।कभी खुद की वजह से तो कभी दुनिया वालोँ
की वजह से ।पर दुनिया वालोँ को बोलने का मौका ही तब मिलता है जब भीतर कोई
हलचल मिलती है ।यहाँ तो सन्नाटा है ,गहरी खामोशियाँ हैँ ।समुद्र से चलने
वाली लहरेँ बार बार साहिल से टकराती है और वहाँ कुछ भी नही पाकर वापस
मायुस हो लौट जाती हैँ खुद के भीतर ।कोसती है ये लहरेँ खुद को खुद के
पैदा होने पर ।ख्वाहिश थी ,तट पर बसने वालोँ को पुरी तरह से सराबोर कर
देने को ।पर महज़ एक ख्वाब ही तो है यह ।अफसोस बिल्कुल भी नही होता इसे
खुद के मिट जाने पर ,हर बार की तरह ।क्योँकि ग़म तो तब होता है ,जब कई
इच्छाएँ पुरी होँ और कोई एक अधुरा छुट जाए ।
जनाब ,यहाँ तो एक लम्बी कतार है -आधे-अधुरे सपनोँ का ।फिर कोई और एक टुट
जाए तो कोई ग़म नहीँ।
पर अफ़सोस तो समुद्र को भी होता है ,उसका एक और प्रयास असफल गया ।लहरेँ
खुद पैदा नही होती ,ये तो भावनाओँ के उमड़ने से बना बादल है जो हर वक्त
बरसता रहता है ,किसी खास के उपर ।।

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